देश की महिलाएं आगे बढ़ रही है, वे अब पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नहीं बल्कि उनसे भी आगे निकल रही हैं। वे घर संभालती हैं, परिवार को देखती हैं, हर दुख-तकलीफ का सामना करते हुए अपना जीवन बसर करती हैं, लेकिन कभी किसी से शिकायत नहीं करती हैं। जहां पहले मीरा बाई चानू ने देश को पहला पदक दिलाया, तो वहीं अब बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन भी देश के लिए अपना पदक पक्का कर चुकी हैं। ऐसे में महिलाओं ने ये एक बार फिर से बता दिया कि वे किसी भी मामले में बाकी लोगों से कम नहीं हैं।

बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को खेले गए एक तरफा मुकाबले में चीन ताइपे की निएन चिन चेन को 4-1 से मात दे दी.लवलीना बोरगोहन विश्व चैंपियनशिप में दो कांस्य और एशियाई चैंपियनशिप में एक बार कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी हैं। लवलीना की उम्र भले ही 23 साल है, लेकिन उनके इरादे साफ हैं। असम के एक छोटे से गांव से उन्होंने टोक्यो ओलंपकि तक का सफर तय किया है।

मीराबाई चानू टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला और एकमात्र वेटलिफ्टर हैं। लेकिन यहां ये समझना जरूरी है कि उन्होंने इस पदक को पाने के लिए कितनी मेनहत की। उन्होंने बता दिया कि अगर मेहनत सच्ची है तो फल मीठा जरूर होगा। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में ही नहीं, बल्कि भारत का नाम विश्व पटल पर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

 

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