पंजाब में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर नवजोत सिंह सिद्धू की नियुक्ति कर गांधी परिवार ने एक साहसिक फैसला किया है. इस निर्णय गांधी परिवार ने पार्टी हाईकमान के रूप में अपने अस्तित्व को फिर से सर्वोच्च साबित किया है,

जो लगातार चुनावी हार के कारण काफी कमजोर पड़ता नजर आ रहा था. इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि पार्टी में अगर प्रियंका गांधी के फैसलों का असर बढ़ता हुआ नजर आता है, तो कांग्रेस में प्रशांत किशोर और कमलनाथ की बड़ी भागीदारी भी देखने को मिल सकती है.

सिद्धू की नियुक्ति का श्रेय प्रियंका को

ऐसा इसलिए भी समझा जा रहा है क्योंकि, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नाराजगी के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब की कमान देने के फैसले का श्रेय पार्टी के अंदर प्रियंका गांधी को ही दिया जा रहा है. उनके अपने तरीके ने ही उनके लिए समस्याएं पैदा कर दी हैं और ये ऐसे वक्त में हुआ है जब वो 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगे हैं.

हाईकमान को इग्नोर करते रहे कैप्टन

दो महीने पहले प्रियंका गांधी ने चंडीगढ़ में अपना दूत भेजकर पंजाब के सियासी हालात पर चर्चा करने का जो संदेश भिजवाया था, उसे कैप्टन अमरिंदर ने दरकिनार कर दिया. कांग्रेस की परंपरा के लिहाज से कैप्टन अमरिंदर के इस रवैये को अगर ईशनिंदा न भी कहा जाए तो ये एक तरीके की अवहेलना तो थी ही.

कांग्रेस पैनल की बात भी नहीं मानी

इस सबके बीच, तीन सदस्यीय कमेटी ने 18 बिंदुओं की सिफारिश रिपोर्ट जमा करा दी. इस कमेटी ने कैप्टन अमरिंदर से सिद्धू चुनावी तैयारियों में लगाने और ‘सुटेबल’ पद देने की बात कही. क्योंकि अगर कैप्टन अमरिंदर बगावत करते हैं तो अब तक कांग्रेस और प्रियंका की जो स्टोरी बहुत अच्छी नजर आ रही है वो अस्तित्व बचाने की एक गंभीर लड़ाई बन जाएगी.

 

 

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