टेबल टेनिस  का खेल सबसे पहले साल 1988 से ओलिंपिक खेलों में शामिल हुआ था. तबसे लेकर अब तक वह लगातार ओलिंपिक का हिस्सा रहा है. शुरुआत में यह खेल यूरोप में ज्यादा लोकप्रिय था लेकिन पहली बार वर्ल्ड कप की मेजबानी करने के बाद एशिया में यह खेल काफी लोकप्रिय हो गया और आज एशियन देशों  का ही इस खेल में दबदबा है.भारत की ओर से इस बार चार खिलाड़ी टोक्यो ओलिंपिक में हिस्सा लेने वाले हैं. मिक्स्ड डबल्स वर्ग में भारत की ओर से अचंत शरत और मनिका बत्रा की जोड़ी मेडल के लिए दावेदारी पेश करेगी.

सर्विस करने के नियम

टेबल टेनिस में सिंगल्स और डबल्स दो इवेंट होते हैं. हर खिलाड़ी के पास एक बल्ला (रैकेट) होता है. यह रैकेट रबड़ से लेमिनेट किया हुआ होता है. टेबल टेनिस के टेबल की लंबाई 9 फुट, चौड़ाई 5 फुट, सतह की मोटाई 1 इंच (या 3/4 इंच भी) होती है. वहीं भूमि से उसकी ऊंचाई 2.5 फुट होती है. . टेबल के बीच में एक नेट होता है जो कि 6 इंच ऊंचा होता है और उसकी लंबाई 183 सेंटीमीटर होती है. अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस संघ द्वारा मंजूर टेबल की सतह ग्रीन या ब्लू होनी चाहिए.

कैसे होता है विजेता का फैसला

खिलाड़ी जितनी भी उल्लंघन करता है उसके विरोधी को अंक मिलता है. अगर खिलाड़ी का शॉट नेट से टकरा जाए, या वह विरोधी के शॉट को टेबल पर एक टप्पा खाने के बाद उठा नहीं पाता है तब भी उसके विरोधी को अंक मिलता. गलत सर्व करने पर भी विरोधी को अंक मिलता है.

 

@TODAYINDIALIVENEWS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here