मैच के टिकट के दाम उस खिलाड़ी के खेलने या न खेलने से तय होता था. इंग्लैंड में एक क्रिकेट ग्राउंड के दरवाजे पर आज भी लिखा है- ‘क्रिकेट मैच एडमिशन 3 पेन्स, इफ डब्ल्यू जी ग्रेस प्लेज एडमिशन 6 पेन्स.

आधुनिक क्रिकेट डब्ल्यू जी ग्रेस की ही देन

लंदन के ब्रिस्टल में आज ही के दिन 1848 में डब्ल्यू जी ग्रेस का जन्म हुआ था. शानदार ऑलराउंडर- धुरंधर बल्लेबाज, चतुर गेंदबाज के अलावा गजब के फील्डर रहे ग्रेस कभी ‘चैम्पियन’ तो कभी ‘डॉक्टर’ उपनामों से जाने गए, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी लंबी दाढ़ी थी

आउट होना उन्हें कभी नहीं भाता था

ग्रेस बल्लेबाजी करते वक्त गेंद को शीघ्रता से समझने की अद्भुत क्षमता रखते थे. अल्फ्रेड शॉ ने एक बार उनके बारे में कहा था, ‘मैं जहां भी चाहता उन्हें वहां गेंदें डालता था और यह बूढ़ा आदमी उसे जहां चाहता वहां मारने की काबिलियत रखता था.’ ग्रेस बहुत ‘मूडी’ भी थे. आउट होना उन्हें कभी नहीं भाता था.

इस वजह से कहे जाते थे डॉक्टर

उनके पिता हेनरी मिल ग्रेस डॉक्टर थे और उन्हें भी डॉक्टर ही बनाना चाहते थे. इसलिए 1868 में ग्रेस ने ब्रिस्टल मेडिकल में दाखिला ले लिया. लगातार क्रिकेट खेलते रहने की वजह से उन्हें मेडिकल की परीक्षा पास करने में 11 साल लग गए. और तभी से डॉक्टर कहलाए.

 

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