कुछ महिलाएं डिलीवरी के दौरान एक साथ दो या तीन बच्चों को जन्म देती हैं. मेडिकल साइंस के मुताबिक, एक स्पर्म से केवल एक ही बच्चा पैदा होता है तो फिर जुड़वा बच्चों के पीछे क्या लॉजिक है. क्या जुड़वा बच्चों के पीछे दो स्पर्म होते हैं. जी नहीं दरअसल पहले स्पर्म के अंदर जाते ही अंडा खुद को सील कर लेता है और उसके बाद वहां कोई दूसरा स्पर्म दाखिल नहीं हो सकता,

कैसे पैदा होते हैं जुड़वा बच्चे– जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं आइडेंटिकल और नॉन-आइडेंटिकल. मेडिकल भाषा में इन्हें मोनोजाइगोटिक और डायजाइगोटिक कहा जाता है. आमतौर पर महिला के शरीर में एक अंडा होता है जो एक स्पर्म से मिलकर एक भ्रूण बनाता है. लेकिन कई बार इस फर्टिलाइजेशन में एक नहीं बल्कि दो बच्चे तैयार हो जाते हैं.

किन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि औरत के शरीर में एक बार में ही दो अंडे बन जाएं जिन्हें फर्टिलाइज करने के लिए दो स्पर्म की जरूरत पड़ती है. इसमें दो अलग-अलग भ्रूण तैयार होते हैं. इस कंडीशन में पैदा होने वाले बच्चों में अपनी-अपनी प्लेसेंटा होती है. इसमें एक लड़का और एक लड़की भी हो सकती है.

क्यों बढ़ रहे जुड़वा– एक्सपर्ट के मुताबिक, पहले की तुलना में अब औरतें देर से मां बन रही हैं. 30 साल की उम्र के बाद ऐसा ज्यादा देखने को मिलता है. दूसरी वजह है आईवीएफ यानी आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन जैसी तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल. इनमें भी एक से ज्यादा बच्चे पैदा होने की संभावना बनी रहती है.

 

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