जम्मू एयरपोर्ट स्थित एयरफोर्स स्टेशन के अंदर देर रात दो धमाके हुए. पहला धमाका रात 1 बजकर 37 मिनट पर हुआ और दूसरा धमाका ठीक 5 मिनट बाद 1 बजकर 42 मिनट बाद 1 बजकर 42 मिनट पर हुआ. माना जा रहा है कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए IED गिराए गए, क्योंकि एयरफोर्स स्टेशन और बॉर्डर के बीच महज 14 किलोमीटर की दूरी है और  ड्रोन के जरिए 12 किलोमीटर तक हथियारों को गिराया जा सकता है.

निशाने पर थे एयरक्राफ्ट
इन धमाकों को अंजाम देने के लिए दो ड्रोन का इस्तेमाल करने की बात सामने आ रही है. इस बात की आशंका और भी गहरी इसलिए हो जाती है

इस तरह का पहला ड्रोन हमला होगा!
अभी जांच की जा रही है कि क्या ये ड्रोन हमला ही था या किसी और वजह से धमाका हुआ. लेकिन सूत्रों का कहना है कि वायुसेना की पेट्रोलिंग टीम ने हथियारों को गिरते देखा था

एयर मार्शल विक्रम सिंह पहुंचेंगे मौके पर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना वाइस एयर चीफ एयर मार्शल एचएस आरोड़ा से बात की है और मामले पर जानकारी ली है. अब वेस्टर्न कमांड के दूसरे सबसे सीनियर अधिकारी एयर मार्शल विक्रम सिंह हालात का जायजा लेने के लिए एयरफोर्स स्टेशन पहुंचने वाले हैं

ड्रोन हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं
हालांकि, अभी धमाकों में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और कुछ साफ-साफ कहा भी नहीं जा रहा हैं.

ड्रोन को पकड़ पाना मुश्किल टास्क
ड्रोन को पकड़ पाना बहुत मुश्किल टास्क है, क्योंकि दुनियाभर की कंपनियां डिटेक्शन के लिए तीन तरह की टेक्नीक अपनाती हैं पहली RF-मॉनिटरिंग, दूसरी रडार और तीसरी ऑप्टिकल सेंसर (कैमरा). हालांकि, इन तीनों की ही अपनी कुछ लिमिटेशन भी है.

 

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