मध्य प्रदेश के इंदौर में 12 साल की एक मासूम बच्ची के हौसले ने उसे एक फेफड़े के साथ जिंदा रख रखा है. यही नहीं बच्ची के मजबूत इरादों के चलते उसने कोरोना जैसी गंभीर महामारी पर विजय हासिल कर ली है. सिमी ने 15 से 20 दिनों तक एक फेफड़े के साथ जो 40% ही काम करता है, कोरोना की जंग जीत ली. बच्ची ने अपने 40 प्रतिशत लंग्स के साथ पर अपनी मजबूत इच्छाशक्ति, हौसले और दृढ़ आत्मविश्वास के बदौलत कोविड-19 जैसी घातक महामारी पर विजय हासिल कर ली.

सिमी के पास जन्म से ही उसका एक हाथ नहीं है. जिंदा रहने के लिए वह हर रोज एक-एक सांस के लिए लड़ती है. जिंदा रहने के लिए वह हर रोज एक-एक सांस के लिए लड़ती है. 4 साल से हर रात उसे ऑक्सीजन लगती है, लेकिन उसके हौसले के आगे कोरोना भी पस्त हो गया है. ऐसे में जब कोरोना संक्रमण फैला तो माता-पिता ने उसका बहुत ध्यान रखा, लेकिन कुछ समय बाद अनिल दत्ता भी संक्रमण की चपेट में आ गए घर में ही ही उसे बायपेप और ऑक्सीजन लगाई.  कई दिनों तक वह इसी स्थिति में रही. लेकिन फिर भी उसने हौसला नहीं हारा और 12 दिन बाद कोरोना से भी जंग जीत ली.

 

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