उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए पशोपेश की स्थिति बनी हुई थी. समन्वय और संतुलन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपनी ताकत लगा रखी थी. लगातार बैठकों का दौर, पर्यवेक्षकों का दौरा, दिल्ली में रिपोर्ट तलब और सवाल-जवाब का क्रम जारी था.
इस अस्थिरता में असहमतियों ने अवसर तलाशा और अपना विरोध लिखकर या बयान देकर दर्ज किया,

अडिग रहे योगी
लेकिन अपने विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अडिग रहे. उन्होंने न तो राज्य में कैबिनेट विस्तार की बात स्वीकारी और न ही विरोधियों के प्रति कोई लचीलापन दिखाया. योगी की राजनीति और प्रशासन प्रबंधन का तरीका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलता जुलता है. नौकरशाही को मजबूत रखकर अपने हाथ में सारे घोड़ों की लगामवाली शैली में योगी भी काम करते हैं. प्रदेश में भाजपा के लिए फिलहाल योगी से बड़ा चेहरा और कोई नहीं है

राहत की तस्वीर
भाजपा को यह भी समझ आया कि दोनों तरफ की तनातनी को लंबा खींचने से पार्टी का ही नुकसान हो रहा है. समाधान के प्रयास कहीं अस्थिरता और छवि को औऱ खराब न करें, इसके लिए ज़रूरी था कि तत्काल अस्थिरता को खत्म किया जाए. उत्तर प्रदेश में भाजपा का गतिरोध फिलहाल थम चुका है. ये तस्वीर इसका सबूत है. विरोधियों को भी संघ और भाजपा का संदेश स्पष्ट है कि अभी सारा ध्यान आगामी चुनाव पर केंद्रित करें. तस्वीर आने के कुछ ही घंटों बाद भाजपा महासचिव अरुण सिंह ने भी बयान दिया है कि सीएम योगी ही यूपी में 2022 का चेहरा हैं.

 

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