केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षा कोविड -19 के प्रकोप के कारण कक्षा 12वीं की परीक्षा कैंसिल कर दी है. अब शिक्षकों और छात्रों के बीच इसी बात की चर्चा हो रही है कि कक्षा 12 के छात्रों के लिए इवैल्यूएशन पॉलिसी क्या हो सकता है. हाल ही में सीबीएसई ने  कक्षा 10 के छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक फॉर्मूला तैयार किया था, लेकिन अब 12वीं के मामले में कई हितधारकों ने चेतावनी दी है कि वरिष्ठ छात्रों यानी कि 12वीं के लिए एक ही मानदंड का उपयोग नहीं किया जा सकता है. कक्षा 10 की परीक्षाएं कैंसिल होने के बाद छात्रों के लिए एक मूल्यांकन पैटर्न न‍िकाला था. इस पैटर्न में दो खास पहलू शामिल किए गए थे. जिसमें दो तरह से मूल्यांकन करना था, पहला छात्र के अंतिम स्कोर की गणना कैसे की जाएगी और दूसरा स्कूल में उनके परफार्मेंस के आधार पर सभी छात्रों के अंकों का मानकीकरण कैसे किया जाएगा.

इसमें प्री बोड परीक्षा को भी शामिल किया गया है. इस तरह उन्हें एक साथ 80 अंकों का मूल्यांकन होगा. बाकी बचे 20 नंबर आंतरिक मूल्यांकन पर आधारित होंगे, जो कि संभावना है कि मार्च तक सामान्य बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन के हिस्से के रूप में अधिकांश स्कूल पूरा करेंगे. अब 12वीं के मूल्यांकन को लेकर दसवीं कक्षा के लिए लागू पॉलिसी को लेकर आवाजें उठने लगी हैं. कई स्टूडेंट्स और श‍िक्षाविद इसे 12वीं के लिए सही नहीं मान रहे हैं. मंगलवार को इस सिलसिले में दिल्ली उच्च न्यायालय में जस्टिस फॉर ऑल एनजीओ की ओर से एक याचिका भी आई है.

शालीमार बाग स्थित मॉडर्न पब्लिक स्कूल की वाइस प्रिंसिपल मेना मित्तल ने कहा कि दसवीं का छात्र अपने प्री-बोर्ड को कक्षा 12 के छात्र की तुलना में अधिक गंभीरता से लेता है. वहीं 12वीं के छात्र को उसी दौरान उच्च शिक्षा के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपस्थित होना पड़ता है. ऐसे में यदि हम प्री-बोर्ड परीक्षाओं को 40% वेटेज देते हैं, तो स्कूल के परिणाम उच्च प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी बुरी तरह प्रभावित करेंगे.

 

@TODAYINDIALIVENEWS