सचेंडी में खनन माफिया के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से लेकर आईजी रेंज तक से मामले की कर डाली शिकायत लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अवैध खनन में पुलिस मूक दर्शक बनकर पीड़ितों का ही उत्पीड़न कर रही है।

कानपुर में सचेंडी के गदनखेड़ा में बेख़ौफ़ खनन माफिया का आतंक चरम पर है। दुस्साहसी माफिया ने पुलिस की मिली भगत से अवैध खनन कर गांव की 200 बीघे से ज्यादा जमीन खोद डाली है। इसमें खेत, चकरोड और बाग भी शामिल हैं।

अवैध खनन की वजह से खेतों में पानी तक नहीं पहुंच पा रहा है। शिकायत के बाद भी पुलिस और प्रशासन मौन है। बेबस ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर आईजी, एसपी आउटर और डीएम तक से मामले की शिकायत की है। लेकिन मामले में अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई उल्टा सचेंडी पुलिस पीड़ितों का ही उत्पीड़न कर रही है और करे क्यो न मामला सत्ताधारी नेता के गुर्गे का जो ठहरा।

अशोक नगर स्थित कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में गदनखेड़ा गांव के ग्रामीणों ने प्रेसवार्ता करके बताया कि सचेंडी में खनन का खेल नया नहीं कई सालों से चल रहा है। गाँव के राजेन्द्र सिंह ने बताया कि उनके खेत के बगल में रामबाबू का खेत है जिसमें खुद को भाजपा नेता बताने वाले दबंग राघवेंद्र सिंह और इसके साथी राहुल सिंह, प्रीतम सिंह, मुन्नु सिंह और उदय वीर सिंह ने खेत से मिट्टी हटाने का ठेका लिया और 3 फिट मिट्टी हटाने की 20-20 फिट मिट्टी खोद डाला और अब हमारे खेतो से जबरन खनन करने की कोशिश कर रहे है। राघवेंद्र सिंह के खिलाफ पनकी थाने में कई मुकदमे भी दर्ज है। बस पुलिस और प्रशासन की आंखें बंद हैं। अलग-अलग जगहों पर बीस से चालीस फीट गहरे गड्ढे खोदकर खेतों को तालाब बना दिया गया है।
गांव के ही किसान धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि खनन माफियाओं ने आतंक मचा रखा है जब मैंने विरोध किया तो बीती 16 मई को दबंग राघवेंद्र सिंह और उसके गुर्गों ने सरेराह रोककर धर्मेंद्र को जमकर पीटा बकौल धर्मेंद्र जब उन्होंने सचेंडी थाना जाकर शिकायत की पुलिस ने दबंगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाए पीड़ित धर्मेंद्र और बीच-बचाव करने वालो पर ही 151 की कार्यवाही कर दी, आजिज होकर धर्मेंद्र ने आईजी मोहित अग्रवाल, एसपी आउटर और मुख्यमंत्री पोर्टल पर मामले की शिकायत की लेकिन कार्यवाही न होने से दबंगो के हौसले बुलंद है और वो लगातार पीड़ितों को धमका रहे है यही नही राघवेंद्र सिंह तो खुद को विधायक को राइट हैड बताकर पीड़ितों का मुंह बंद करने में जुटा है।

किसानों का कहना है कि माफिया ने गांव की दो सौ बीघे से ज्यादा जमीन पर मिट्टी का खनन कर उन्हें गहरे तालाबों में बदल दिया है। इसके कारण माइनरों से आने वाला पानी इन्हीं तालाब जैसे गड्ढों में भर जाता है और खेतों तक नहीं पहुंच रहा है। विरोध करने पर माफिया के गुर्गे किसानों पर हमला भी करते हैं।

रातभर होता है अवैध खनन

ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में रातभर अंधाधुंध खनन किया जाता है। शाम ढलते ही माफिया की जेसीबी मशीनों और डंपरों की गांव में आवाजाही शुरू हो जाती है। जेसीबी एक डंपर को मुश्किल से 15 मिनट में भर देती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि माफिया एक रात में कितनी मिट्टी खोद रहे हैं। माफिया इस मिट्टी को दलालों के जरिए आसपास खुल रही नई फैक्टरियों व प्लाटिंग करने वालों को महंगे दामों पर बेचते हैं।

छलनी कर दी पेड़ों की जड़ें

अवैध खनन से खेत और बाग भी खोद दिए गए हैं। यहां लगे पेड़ों की जड़ें तक छलनी कर दी हैं। खेतों में लगे नीम व अन्य पेड़ जड़ें कमजोर होने से गिर गए हैं।

कच्ची सड़क पर दौड़ते डंपर

ग्रामीणों के मुताबिक शाम से सुबह तक गांव की कच्ची सड़क पर मिट्टी से भरे डंपरों के अलावा कोई भी ग्रामीण नहीं निकलता। इस कच्ची सड़क पर सिर्फ माफिया की गाड़ियां ही दौड़ती हैं। डंपरों के कारण कच्ची सड़क भी चलने लायक नहीं है।

मजबूर कर रहे खेत बेचने को

ग्रामीणों के अनुसार खनन माफिया पहले किसान के खेत के आसपास अवैध खनन करते हैं। इतनी मिट्टी खोद देते हैं कि किसान का खेत टीले में तब्दील हो जाता है। बारिश होने पर खेतों की मिट्टी बहने के कारण फसल खराब होने लगती है।

इसी मजबूरी का फायदा उठाकर माफिया उनके खेत भी ले लेते हैं। जिसके बाद उनके खेतों को अंधाधुंध खोदकर तालाबों में बदल दिया जाता है। किसान उनकी शिकायत करते हैं तो माफिया जान से मारने की धमकी देते हैं। जिम्मेदार शिकायत पर गौर ही नहीं करते।

सहमति पत्र के बहाने खोदते हैं खेत

नियम यह है कि जिन किसानों के खेतों में मिट्टी ज्यादा जमा होती है, वे खेती के लिए उसे हटवाते हैं। मिट्टी हटाने वालों से बाकायदा एक सहमति पत्र बनता है। इसमें यह उल्लेख किया जाता है कि मिट्टी कितनी खोदी जानी है। यह खेत के आकार और मिट्टी पर भी निर्भर करता है। साथ ही मिट्टी अगल बगल डाली जाएगी। लेकिन खनन माफिया खुलेआम चार की जगह 40 फीट तक मिट्टी खोदते हैं और उसे अगल-बगल डालने के बजाय बेच देते हैं।

 

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