आपको बता दे कि देश में कोरोना की वजह से ऑक्सीजन की भारी किल्लत के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता स्टरलाइट प्लांट को फिर से खोलने की इजाजत दे दी है। हालांकि, वेदांता यहां सिर्फ ऑक्सीजन उत्पादन कर सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ऑक्सीजन की कमी पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। बता दें कि यह प्लांट प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों के विरोध के बाद साल 2018 में बंद कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अब इस प्लांट को ऑक्सीजन उत्पादन के लिए 15 जुलाई तक खोलने की अनुमति दी है। हालांकि, ऑक्सीजन उत्पादन के लिए कंपनी को तमिलनाडु सरकार से बिजली खरीदनी होगी, वह इस प्लांट के जरिए बिजली उत्पादन नहीं कर सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वेदांता द्वारा ऑक्सीजन उत्पादन को लेकर कोई राजनीतिक कलह नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक राष्ट्रीय संकट है और देश की सर्वोच्च अदालत होने के नाते हमें लोगों की जान बचाने के लिए सबकुछ करना होगा।

वेदांता ने कहा है कि वह राष्ट्र के लिए इस प्लांट में उत्पादित ऑक्सीजन मुफ्त में सप्लाई करेगी। वेदांता के लिए कोर्ट में दलील दे रहे वरिष्ठ वकील हरीष साल्वे ने कहा, ‘हम यहां सिर्फ ऑक्सीजन प्लांट संचालित करेंगे न कि पावर प्लांट। बिजली राज्य सरकार देगी।’

इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने साल्वे से पूछा, ‘आप प्लांट कब शुरू कर सकते हैं?’ साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संभवतः 10 दिन के अंदर ऑक्सीजन उत्पादन शुरू हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि 15 जुलाई को स्थिति के हिसाब से यह फैसला लिया जाएगा कि ऑक्सीजन उत्पादन को आगे बढ़ाना है या नहीं।

 

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