अस्पताल में बेड है तो ऑक्सीजन नहीं, मरीज बेहाल 

इस वक्त देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है जिस कारण देश कोरोना वायरस की ऐसी लहर से जूझ रहा है, जिसका कोई अंत नज़दीक नहीं दिख रहा है. आपको बता दे कि जहाँ ऐसी स्थिति में देश के स्वास्थ्य तंत्र की पोल खुल गई है, हर जगह बदहाली है.

जहाँ आज हालात ऐसे हैं कि ऑक्सीजन का जुगाड़ खुद से करना पड़ रहा है. ऑक्सीजन किसी तरह मिल गई तो इंजेक्शन और दवाइयां नहीं मिल रहीं. कोई भी बड़ा शहर हो, इस समय दो चीज़ों की बहुत कमी है. एक तो रेमडेसिवीर इंजेक्शन और दूसरा ऑक्सीजन.

इस वक्त हालात ऐसे है कि अस्पताल मरीजों को एडमिट नहीं कर रहे हैं क्योंकि सप्लाई नहीं है. नई लहर में ऑक्सीजन की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि कोई इसको पूरा नहीं कर पा रहा है, मरीज ऑक्सीजन के बिना तड़प रहे हैं और जान जा रही हैं.

आपको बता दे कि मध्य प्रदेश के रायसेन का हाल बेहद डरावना है, मरीज़ बाहर तड़प रहे हैं लेकिन हॉस्पिटल एडमिट नहीं कर रहे हैं. क्योंकि उनके पास ना बेड हैं ना ऑक्सीजन है अस्पताल का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी ऐसी है कि जिस एम्बुलेंस में मरीज़ों को लाना होता है, उसमें सिर्फ सिलेंडर को ढोया जा रहा है.

लेकिन ये सिर्फ एक अस्पताल का हाल नहीं है. मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी का हाल तो ये है कि कई अस्पताल अब गंभीर मरीजों को एडमिट नहीं रहे, लोग अपने ऑक्सीज… सिलेंडर का इंतज़ाम खुद कर रहे हैं. जिन्हें अस्पताल एडमिट भी कर रहे हैं, उनके परिवारवालों से पहले ही बताया जा रहा है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी है और लिख कर लिया जा रहा है अगर कोई अनहोनी हुई तो अस्पताल जिम्मेदार नहीं होगा.

जहाँ मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि उसने ऑक्सीजन की उपलब्धता 130 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 267 मीट्रिक टन कर दी है, यानी दो गुना ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ा दी गई. लेकिन डिमांड इससे भी दो गुना ज़्यादा है, इसलिए संकट तो होगा ही.

 

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