तहसील प्रशासन की लापरवाही से बढ़ रहा तालाबों पर अतिक्रमण,

मुख्यमंत्री एवं न्यायालय का आदेश बेअसर
* कागज में दम तोड़ रहा अतिक्रमण मुक्त तालाबों का निर्देश।
* अतिक्रमण की शिकायत करने पर भू माफिया देते हैं फर्जी मामले में फंसाने की धमकी।
* स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते लेखपाल दे रहा भू माफियाओं को संरक्षण।
* भू माफिया ने अतिक्रमण की शिकायत करने वाले फरियादी के विरुद्ध दिया शिकायती पत्र।
बारा: उच्च न्यायालय द्वारा तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश भले ही सख्त हो और प्रदेश की सरकार भी न्यायालय के निर्देश का सख्ती से पालन कराने के लिए जिम्मेदारों को निर्देश देती है लेकिन क्षेत्र में तैनात अधिकारियों की उदासीनता एवं संबंधित हल्का लेखपाल के संरक्षण से भू माफियाओं का मनोबल बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि तालाबों पर बने अवैध अतिक्रमण हटना तो दूर अब भूमाफिया द्वारा नए निर्माण शुरू कराए गए हैं। अवैध निर्माण की शिकायत करने पर भूमाफिया द्वारा शिकायतकर्ता के विरुद्ध फर्जी शिकायत अधिकारियों को देकर उसे धमकाया जा रहा है जिससे ग्रामीणों में भी आक्रोश व्याप्त है। उक्त मामला बारा तहसील के ग्राम पंचायत धरा का है।
क्षेत्र के ग्राम पंचायत धरा में तालाब पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत एक दशक से ग्रामीणों द्वारा संपूर्ण समाधान दिवस में की जाती रही है लेकिन अब तक अवैध अतिक्रमण को हटाया नहीं गया। जब भी शिकायत की गई तो जांच को पहुंचे हल्का लेखपाल लेनदेन कर मामले में फर्जी रिपोर्ट लगाकर अपने कार्य से इतिश्री कर लेते थे। तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए ना केवल स्थानीय लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सख्त निर्देश भी दिए गए हैं लेकिन भू माफियाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और ना ही अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने के लिए कोई सख्ती की। प्रदेश में योगी सरकार बनते ही सुबह के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू माफियाओं पर सख्ती करने के लिए एंटी भू माफिया सेल का गठन तो किया लेकिन वह महज कागजों में ही दम तोड़ रहा है अब तक क्षेत्र में भू माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए एंटी भू माफिया सेल का कोई प्रयास नहीं देखा गया। ज्ञातव्य हो कि ग्राम पंचायत धारा के तालाब पर अवैध अतिक्रमण को लेकर तत्कालीन तहसीलदार राम कुमार शुक्ला एक्शन में थे जिन्होंने ना केवल सख्ती की बल्कि अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बाकायदा नोटिस भी जारी किया लेकिन दुर्भाग्य है की उक्त अधिकारी का ट्रांसफर हो गया और उसके बाद किसी ने अवैध अतिक्रमण हटाने का प्रयास नहीं किया और इसका फायदा हल्का लेखपाल मंजेश एवं कानून को संतोष यादव ने उठाया। भू माफिया के विरुद्ध तहसील में शिकायत पहुंचते ही भूमाफिया तक शिकायतकर्ता का नाम पहुंच जाता है जिससे उक्त भू माफिया शिकायतकर्ता को ही धमकाने लगता है । इसी मामले को लेकर गुरुवार को गांव के ही एक शिकायतकर्ता के विरुद्ध भूमाफिया शिव बालक ने फर्जी शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। अचंभे की बात है कि जो भू-माफिया शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शिकायती पत्र दे रहा है। उसी के विरुद्ध पूर्व में गांव के दर्जनों किसानों की जमीनों पर फर्जी ढंग से लोन लेकर उस लोन का गबन करने का आरोप लगा था। जिसमें किसानों की शिकायत पर भू माफिया को फर्जीवाड़े में जेल जाना पड़ा था और हाल फिलहाल इसी प्रकार भू माफिया के पुत्र का भी एक मामला सामने आया था जिसमें वह पुलिस भर्ती की परीक्षा के लिए एक सॉल्वर के माध्यम से अपनी परीक्षा करा रहा था । जिसमें उसे भी पकड़े जाने पर जेल जाना पड़ा। भू माफियाओं का वर्चस्व ऐसा है कि शिकायत कर्ताओं को फसाने के लिए अधिकारियों से सीधे सांठगांठ कर उनके विरुद्ध इस बंदी की जाती है और गांव में धमकाया जाता है। समय रहते जिले के अधिकारियों ने ग्राम पंचायत के तालाब पर व्याप्त अवैध निर्माण को हटाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया तो किसी दिन बड़ी घटना हो सकती है। ग्रामीण भी अब इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तब शिकायत करने का मन बना रहे हैं। उक्त मामले को लेकर जब उप जिलाधिकारी सुभाष यादव से जानकारी लेने के लिए सीयूजी नंबर 9454 4178 19 पर फोन किया गया तो कई बार फोन करने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। तहसीलदार आरपी तिवारी से जानकारी लेने की कोशिश की तो उनका सीयूजी नंबर 9454 4178 27 बंद मिला ‌। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं जिले के आला अधिकारी अधिकारियों को भले ही लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए एवं संपर्क बनाने के लिए सीयूजी नंबर मुहैया कराते हैं लेकिन उक्त अधिकारियों द्वारा फरियादियों का फोन उठना भी मुश्किल है

अखिलेश त्रिपाठी ब्यूरो चीफ प्रयागराज