गोरखपुर।टुडे इंडिया लाइव न्यूज । नेशनल कैडेट कोर के मेजर उमंग सिंह ने देश वासियों दीपोत्सव पर्व पर लोगों से अपील करते हुए कहा कि दोस्तों इस बार की दीवाली बहुत स्पेशल है।एक तरफ दिवाली का जोश और दूसरी तरफ कोविड-19 का भय।बहुत अजीब है इस बार की दिवाली।धनतेरस और दिवाली शौक से मनाएं लेकिन कोविड-19 का पूरा ध्यान रखें।बाहर निकलना,पटाखे चलाना,मस्ती मारना घर के भीतर ही करें।और लक्ष्मी जी का स्वागत तो घर में रहकर ही करना ठीक है।कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की तेरहवीं को धनतेरस मनाया जाता है।आज के दिन धनवंतरी और महालक्ष्मी क्षीर सागर से अवतरित हुए थे।आज के ही दिन राक्षस और देवताओं ने समुद्र मंथन किया था जिससे अमृत निकला था।इसलिए आज का दिन इनके जन्मदिन के तौर पर भी मनाया जाता है।धनवंतरी विष्णु के अवतार थे और इन्होंने आयुर्वेद को जन्म दिया।13 नवंबर आयुर्वेद दिवस के तौर पर मनाया जाता है।लक्ष्मी धन की देवी हैं।इन दोनों के साथ में कुबेर जो धन के रक्षक हैं और यमराज जो मृत्यु के देवता है;इनकी भी पूजा लक्ष्मी और धनवंतरी के साथ में होती है। आज के दिन सुबह जल्दी उठो पूजा करो,घर को सजाओ,रंगोली बनाओ और दिवाली के इस मंगलमय त्यौहार की तैयारी शुरू करो।आज के दिन सोना,चांदी,बर्तन आदि खरीदे जाते हैं।व्यापारियों के लिए दुकान को सजाना बिजनेस को नए आयाम देना आज के दिन की महत्वपूर्ण गतिविधियां हैं।जरूर कुछ खरीदें मगर ध्यान से।बाहर यमराज देवता कोविड के वेश में घूम रहे हैं।लेकिन दोस्तों,इसी में जरूरत है हमारी समझदारी की।बाहर गोविंद, नहीं कोविड-१९ है। बाजारों में भीड़ है,लोग अनभिज्ञ तो नहीं,लेकिन जानबूझकर अनजान बने हुए हैं।जान पर खेल कर भी खरीददारी किए जा रहे हैं, धक्का मुक्की और भीड़ भड़क्का चारों तरफ है।लेकिन याद रहे, जिस किसी को भी कोरोना लग गया ना,नानी याद आ जाएगी।जान के लाले पड़ जाएंगे।कहने को कोविड से तकरीबन सभी ठीक हो जाते हैं मृत्यु दर भी 1.48% है,लेकिन जिस घर में किसी एक को हो जाए तो फिर देखो,कैसे हाय तौबा मैच जाती है।मम्मी,पापा दादी,नानी सभी उस पीड़ित को और कोरोना को कोसने लगते हैं।पापा,चाचा,बही बहिन दौड़ दौड़ कर इलाज पर इलाज काढ़े पर काढ़ा और एंटी बायोटिक पीसीएम,जिंकोविट,मल्टी- विटामिन आदि ला ला कर खिला रहे हैं।पूजा की जगह उस मरीज की सेवा हो रही है।दादाजी, नानाजी की सलाह पर सलाह जोकी रेडियो मिर्ची तरह फुल स्पीड पर मिलती है।फिर दुखदाई बात यह भी कि इसका कोई इलाज टीका,इंजेक्शन या दवाई अभी तक बना ही नहीं है।इसलिए बचाव में ही भलाई है।Prevention is better than cure.पर धनतेरस और दीवाली तो जरूर मानना है।अपने घर में, अपनी के साथ।यही तो सीख है दीवाली की, प्यार बांटो।घर में सुबह पूजा और शाम को सुंदर से दिए जलाओ, घर बना कर बेसन कि बर्फी,मट्ठीयां आदि बनाए।मम्मी,चाची,ताई या अपनी भाभी से बनवा कर तो देखो,आनंद आ जाएगा।और अगर पत्नी बनाए तो क्या कहने।धनतेरस आज शाम 13 नवंबर को सूरज ढलने के बाद में शुरू होगा।भैया दोष काल मुहूर्त आज शाम 5:28 से लेकर 8:07 तक रहेगा।इस दौरान आप सभी धनतेरस की पूजा करें।इस साल ऋषभ काल मुहूर्त और प्रियदोष काल मुहूर्त एक साथ आज ही शाम को 5:32 से 7:27 तक होगा।लोग जुआ खेलना भी एक अच्छा मुहूर्त मानते हैं लेकिन कोविड के इस माहौल में जुआ खेलना मौत को दावत देना के बराबर है।अपने घर में रहो, सुखी रहो,स्वस्थ रहो इसी में सबका भला है।दो दिन बाद दीवाली है,श्री राम रावण वध कर अयोध्या इसी दिन आए थे।आइए हम सब मिलकर इस धनतेरस और दीवाली को आनंदमय बनाएं।

 

सोनू कुमार यादव संवाददाता