पडुआ प्रतापपुर में जमुना जी से निकली बाघला पम्प नहर लगभग तीस किलोमीटर का दायरा पार करते हुए नारीबारी टेल तक पहुँचती है।विगत सप्ताह में किसी तरह टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया गया, किन्तु पूरी छमता से नहर नहीं चलाने के कारण किसानों को भरपूर पानी नहीं मिल पाया।रोस्टिंग के नाम पर चार दिन टेल की तरफ नहर चला कर फिर माइनरों को खोल दिया गया।दुबारा रोस्टिंग के इंतजार करते किसानों की उम्मीद तब टूट गई जब अधिशासी/अधिकछन अभियंता ने सत्रह अक्टूबर से नहर बन्द करने की घोषणा कर दिया।इससे किसानों में चिंता एवं आक्रोश व्याप्त है।किसानों के अनुसार पिछले वर्ष तीस नवम्बर के बाद नहर बन्द किया गया था।शंकरगढ़ विकाशखण्ड के कसौटा छेत्र में बरसात देर से होने के कारण धान की फसल विलम्ब से लगाई गई, उस पर तेज धूप ने और समस्या बढ़ा दिया है।छेत्रीय किसान सुनील सिंह,प्रभाकांत शुक्ल, राधेश्याम सिंह, समरजीत सिंह,मुन्नालाल शुक्ल,लोकेन्द्र सिंह, आनन्द, गुलजारआदि ने बताया कि जेसीबी मशीन से नहर की खुदाई करवाने से किसानों की नालियां ऊपर हो गई हैं।उस पर फिर से सिल्ट सफाई के नाम पर अभी से नहर बन्द करने से धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है।रास्ते में करिया कला, जिगना, गड़इया, देवरा, एवं सुरवल सहनी माइनर खुलने पर नारीबारी टेल की ओर पानी बहुत कमजोर हो जाता है।किन्तु अधिकारी जमीनी हकीकत से अनजान होकर नहर बन्द करने की घोषणा कर दिया।जबकि सदैव पंद्रह नवंबर तक नहर चलाई जाती थी। टेल पर नारीबारी, लोहरा, जगिरहवा, सुरवल चन्देल, सुरवल सहनी, हिनौती,झंझरा सहित दर्जनों गांवों की सिंचाई न हो पाने से किसानों की हजारों एकड़ जमीन में लगाई धान की फसल सूखने के कगार पर है।नहर विभाग के रवैये से परेशान किसानों ने उपजिलाधिकारी बारा को ज्ञापन देकर पंद्रह नवम्बर तक पूरी छमता से टेल तक नहर चलाने की माँग किया है।

अखिलेश त्रिपाठी ब्यूरो चीफ प्रयागराज