सरकार द्वारा दिये जा रहे ग्राम सभा के विकास के पैसे को ग्राम प्रधान समझते हैं अपना
शौचालय नाली खड़ंजा के आये पैसे से खुद का बना लिए आलीशान मकान गरीब जनता का नही ध्यान आवास व शौचालय के लिए मांगते हैं रुपये
मामला प्रयागराज जनपद विकास खंड चाका अंतर्गत उभारी गांव का हैं जहा ग्राम प्रधान के चमचों के द्वारा गांव की भोली भाली गरीब जनता से शौचालय आवास व पेंसन के नाम पर की जाती हैं धन उगाही। ग्रामीणों ने बताया कि गांव का सफाई कर्मी भी इन्ही के कहने पर चलता हैं गांव में लगा है गंदगी का अंबार ग्रामीण अपने से साफ करने को मजबूर नाली। सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों को गांव का विकास करने के लिए दिए जा रहे लाखों रुपयों का ग्राम प्रधान उभारी ने घोटाला किया शौचालय का पैसा तो ग्रामीणों के नाम पर निकाल लिया पर आज तक सिर्फ गिने चुने लोगो को ही दिया
गांव के ही एक समाजसेवी अबरार अहमद ने बताया कि जिसके पास रहने के लिए ठीक से घर नही है उनको प्रधान ने अपात्र घोषित कर दिया वो लोग टूटे फूटे झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।
सरकार के द्वारा भले ही भ्रष्टाचार करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए जा रहे हैं, पर गाँव की निचली पंचायत के जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों का निर्वाहन सही तरीके से ना करते हुए वे केवल अपना विकास कर रहे हैं। ग्राम प्रधान उभारी जिनके द्वारा ग्राम सभा में विकास के नाम पर केवल कागजी घोड़ा दौड़ाया गया और विकास के नाम पर आने वाले पैसों का संबंधित अधिकारियों से मिल करके बंदरबांट किया गया। वही ग्रामीणों के द्वारा आरोप लगाया गया कि ग्राम सभा में 269 शौचालय स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने थे जिनमें से शौचालय सूची में शामिल रहते हुए भी उनके शौचालयों का निर्माण कागजों पर ही करा कर के उसकी एमआईएस फीडिंग भी ग्राम प्रधान उभारी के द्वारा चाका विकासखंड के एडीओ पंचायत की मिलीभगत से करा दिया गया। जब कि शौचालय पाने वालों को जब इस बारे में जानकारी हुई तो उनके द्वारा ग्राम प्रधान के विरुद्ध ब्लॉक मुख्यालय से लेकर के तहसील स्तर तक शिकायत की गई। लेकिन भ्रष्टाचार के बोल बाले के आगे इन 40 लोगों की शिकायतों को अधिकारियों ने रद्दी की टोकरी में डाल कर जला दिया गया। जब कि उभारी ग्राम सभा में आज भी 80% लोग खुले में शौच करने के लिए विवश हैं जिसमें महिला पुरुष सभी वर्ग के लोग शामिल रहते हैं। वही गांव के ही लोगों के द्वारा बताया गया कि ग्राम प्रधान के चमचों के द्वारा कई लोगों का शौचालय बनाने के लिए गड्ढा खोदवाया गया लेकिन फिर ग्राम प्रधान ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उनके नाम से स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालय आए ही नहीं है। जबकि ग्रामीणों के द्वारा जब सूची निकाली गई तो उसे सूची में उन सभी के नाम भी शामिल थे लेकिन उनके शौचालय आज तक नहीं बनवाए गए हैं। वही ग्राम प्रधान के द्वारा 269 शौचालयों में से केवल उन्हीं शौचालयों का निर्माण कराया गया जो ग्राम प्रधान के सबसे करीबी व चहेते हैं।

 

प्रयागराज से नीरज केसरवानी की रिपोर्ट