वर्तमान समय में भू माफियाओं की सक्रियता इस कदर बढ़ गई है कि वह गांव के भोले-भाले किसानों को किसी बहाने से अपहरण करके और उन्हें डरा धमका कर के उनके नाम पर दर्ज जमीनों का बैनामा करा ले रहे हैं | जहां बारा तहसील में भू माफियाओं की सक्रियता इस समय काफी हद तक तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है | इसी क्रम में बारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत डिहवा गांव के किसान अशोक कुमार जायसवाल उम्र 55 वर्ष जो कि मानसिक रूप से विक्षिप्त है उनका अपहरण 21 सितंबर को कुछ भू माफियाओं के द्वारा कर लिया गया और फिर दिनांक 25 व 26 सितंबर को उनके नाम पर दर्ज लगभग 5 बीघे जमीन का बैनामा भू माफियाओं के द्वारा करा लिया गया | जबकि भू माफियाओं के द्वारा बैनामा कराई गई जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग 30 के बगल होने के कारण उपरोक्त जमीन की कीमत करोड़ों में है | पिता के गायब होने के बाद बेटे शुरेश कुमार के द्वारा बारा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी | लेकिन कुछ लोगों के द्वारा गायक अशोक कुमार के परिजनों को बताया गया कि अशोक कुमार जायसवाल दिनांक 25 व 26 सितंबर को बारा तहसील कैंपस में देखे गए हैं जिसके बाद गायब पिता की तलाश में बेटा बारा तहसील मुख्यालय में पहुंचकर के लोगों से पूछताछ करने लगा जिसके बाद उसे पता चला कि कुछ भू माफियाओं के द्वारा उसके पिता के नाम से दर्ज पूरी पैतृक संपत्ति का बैनामा करा लिया गया है | जिसके बाद सुरेश कुमार के द्वारा बैनामा की नकल काफी तहसील मुख्यालय से निकलवा कर के उपरोक्त सभी भू माफियाओं के विरुद्ध नामजद मुकदमा बारा थाने में पिता के अपहरण व फर्जी तरीके से जमीन का बैनामा कराने का पंजीकृत कराया गया | वहीं बारा पुलिस के द्वारा भू माफियाओं के नामजद मुकदमा पंजीकृत होने के बाद भी अपहरण किए गए किसान अशोक कुमार जायसवाल के बारे में आज तक पता नहीं लगा पाया गया है | जबकि गायब किसान के बेटे सुरेश कुमार के द्वारा बताया गया कि बैनामे में शामिल दो गवाहों को पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया है जिनके द्वारा बताया गया कि उन्हें पैसों का प्रलोभन देकर के बारा तहसील मुख्यालय में बैठने वाले एक अधिवक्ता के कहने पर उपरोक्त बैनामे में वह गवाह बने थे | जबकि क्रेता और विक्रेता दोनों के बारे में वे कुछ नहीं जानते वही गायब किसान के परिजन बारा पुलिस की लचर कार्यप्रणालीयो को देख कर के काफी असंतुष्ट हैं और भू माफियाओं के द्वारा पिता के साथ किसी अनहोनी की आशंका से भी वे भयभीत हैं |

 

बारा प्रयागराज से नीरज केसरवानी की रिपोर्ट