जसरा बाजार से निकलने वाली दो हजार एक सौ मीटर लंबा तिरंगा यात्रा को प्रशासन ने कानून व कोविड 19 का हवाला दे करके निकलने से पहले ही रोक दिया | घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और तिरंगा लिपटा ही रह गया | जब कि तिरंगा यात्रा को रोके जाने से नौजवानों में आक्रोश छाया रहा।
जसरा बाजार के चिल्ला मोड़ से गौहनिया चौराहे तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती के दिन तिरंगा यात्रा निकाले जाने की तैयारी में क्षेत्र के नौजवान पिछले एक माह से लगे हुए थे | दो अक्टूबर को चिल्ला मोड़ पर बने तिरंगा यात्रा कार्यालय पर सुबह से ही नौजवानों की भारी भीड़ एकत्र होने लगी थी। जिसमें नव जवानों के अंदर भारी उत्साह और उमंग बना था। बारा क्षेत्र के अगल बगल से जहां लोगों के हाथों में तिरंगा वहीं मोटरसाइकिल के ऊपर भी तिरंगा लिए हुए नौजवान 21 सौ मीटर लंबा राष्ट्रीय ध्वज को उठाने की तैयारी में जुट गया था | उसी समय बारा थाना प्रभारी सुनील कुमार सिंह तथा नायब तहसीलदार बारा रविकांत दृवेदी ने पहुंच करके आयोजकों से कार्यक्रम का अनुमति पत्र मांगा | आयोजकों ने दलील दिया कि 21 सौ मीटर लंबा तिरंगा को मात्र 10 10 मीटर की दूरी पर खड़ा नौजवान अपने हाथ से सहारा देने के साथ आगे बढ़ता रहेगा | और इस पर किसी तरह का भीड़ नहीं होगी | सामाजिक दूरी और मास्क और सेनेटाइजर का बराबर प्रयोग होता रहेगा | किंतु प्रशासन बिना अनुमति पत्र के यात्रा नही निकालने के जिद पर अड़ गया | इस बीच प्रशासन और नौजवानों के मध्य लंबी नोक झोंक होती रही | कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में आ रहे महंत आनंद गिरी को भी प्रशासन ने रास्ते में ही कार्यक्रम ना होने की सूचना दे करके वापस कर दिया | कार्यक्रम की वजह से जुटे सैकड़ों नौजवानों ने प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी दिखाते हुए इसे तिरंगा और राष्ट्रवाद का घोर अपमान भी कहा है| कई घंटे नोक झोंक के बाद नौजवान वहाँ से वापस हो गये|

सवाददाता नीरज केसरवानी