देश में बाल विवाह रोकने के तमाम कानूनों के बीच इसकी सार्थकता नजर नहीं आ रही है। चोरी-छिपे बच्चियों और किशोरियों के विवाह के मामले सामने आ ही जाते हैं। बाल विवाह की कुप्रथा की शिकार 17 साल की नाबालिग लड़की ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। उसने चाइल्ड लाइन के सामने गुहार लगाई कि मुझे पढ़-लिखकर आगे बढ़ना है इसलिए मेरा विवाह शून्य किया जाए। चाइल्ड लाइन ने उसके आवेदन को महिला बाल विकास विभाग के जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी और बाल कल्याण समिति को भेज दिया है। अब लड़की के आवेदन पर फैसला कोर्ट करेगा।

सात दिन बाद ही छोड़ दिया ससुराल

उमरिया की इस नाबालिग की शादी सौतेले पिता ने दो साल पहले 15 वर्ष की उम्र में गुना के मुअसा गांव में 35 साल के व्यक्ति से कर दी थी। वह शादी के बाद केवल सात दिन ही ससुराल में रही और फिर मायके आ गई। जब वापस नहीं गई तो ससुराल वालों ने उसे भेजने के लिए घर वालों पर दबाव बनाया। सौतेले पिता ने जब उसे भेजना चाहा तो नाबालिग ससुराल नहीं जाने की जिद पर अड़ गई। घर के बाकी सदस्यों ने भी उसका साथ दिया। कुछ दिन बाद वह मां और भाई के साथ भोपाल आ गई। यहां वह कपड़े की दुकान पर नौकरी कर खुद भी पढ़ाई कर रही है और भाई को भी आइटीआइ में पढ़ा रही है। मां भी दूसरों के घरों में खाना बनाकर घर चलाने में मदद कर रही है।