शहर में एक दिव्यांग महिला के मतदाता सूची में जिंदा होने और अन्य सभी रिकार्ड में मृत घोषित होने का मामला सामने आया है.महिला पिछले चार साल से खुद के जिंदा होने का सबूत दे रही है. मामले के सामने आने के बाद डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं.

जानकारी के मुताबिक मुशहरी प्रखंड के चतुरी पुनास की रहने वाली गीता अब सिर्फ चुनाव आयोग की मतदाता सूची के लिए जीवित है लेकिन जब सरकारी सेवाओं के लाभ की बात आती है तो ये व्यवस्था उसको मृत घोषित होने की बात कह देती है. दरअसल गीता ने ग्रेजुएट तक पढ़ाई की है और उसने आंगनबाड़ी सेवक के पद पर आवेदन किया था लेकिन दबंगों ने उसे डराया धमकाया जिसके बाद उसे अपना आवेदन वापस लेना पड़ा.इसके साथ ही सरकारी रिकार्ड में फेरबदल करके उसे मृत लिखवा दिया जिसके बाद गीता को सभी सरकारी योजनाओं के लाभ मिलना बंद हो गए.

गीता को 2016 में उसके सरकारी रिकार्ड में मृत होने की बात उस वक्त पता चली जब उसे सामाजिक सुरक्षा कोषांग ने मृत बता कर उसकी विकलांगता पेंशन रोक दी.तब से गीता खुद को जिंदा साबित करने की जदोजहद में लगी है.उसके परिवार में पति और दो बच्चे हैं. राशन कार्ड से भी उसका नाम मृत घोषित होने कारण गायब हो गया है.