संवाददाता आशुतोष मिश्रा

उन्नाव। सफीपुर/ देश के प्रधान मंत्री के स्वच्छ भारत मिशन का सपना विकास खंड के जमुनिया कक्ष गांव में तार तार होता नजर आ रहा है। गांव में प्रवेश करते ही आपको इसका अहसास हो जाएगा। यह हालत तब है जबकि को
रोना संक्रमण और संचारी रोगों की रोकथाम के तहत गांवों में विशेष तौर पर स्वच्छता अभियान चलाने के दावे जिला प्रशासन कर रहा है। हलांकि इस गांव की तस्वीरें प्रशासन के दावों की हवा निकालती नजर आ रही है।
विकास खण्ड क्षेत्र के गांव जमुनिया कक्ष में प्रवेश करने का रास्ते पर ही गंदगी बिखरी पड़ी है। गांव के नाम का पत्थर मलबे के ढेर से छिपा हुआ है। सरकारी स्कूल की दीवार के साथ गोबर डाला जा रहा है। इसके अलावा गांव में कई जगह टूटी हुई सड़कें हैं और बजबजाती नालियां इस बात की तस्दीक करती नजर आती हैं कि यहां विकास के नाम जनता के साथ छलावा हो रहा है। गांव में सफीपुर परियर से फतेहपुर चैरासी से दबौली जाने वाले मार्ग पर जमुनिहा के मजरा मेदपुरवा में नीरज के घर से बल्लू आदि के घरों की ओर जाने वाली सड़क इतनी खस्ताहाल है कि इस पर वाहन चलाना बहुत मुश्किल है। चार पहिया वाहन यहां कीचड़ में फंस जाते हैं। बारिश के दिनों में सड़क के हालात और भी बदतर हो जाते हैं। तेज वर्षा के दौरान जलभराव की वजह से सड़क और गहरे गढ्ढों का पता ही नहीं लग पाता, जिसकी वजह से कई लोग गढ्ढे में गिर जाते हैं। हालांकि सरकार द्वारा समय समय पर मार्गो की दुस्तीकरण के लिए लाखों रूपया देने के बाद भी सुधार होता नही दिख रहा है। स्वच्छता अभियान व सड़क की मूल सुविधा में यह गांव काफी पिछड़ा हुआ नजर आता है। गांव में विकास के नाम किस तरह छलावा हुआ उसका मुजायरा गांव के प्रवेश स्थान पर ही देखने को मिल जाता है जहां से गांव के अंदर आने वाली सड़क का कुछ टुकड़ा बनाकर बाकि का छोड़ दिया गया है। इस सड़क पर चलना बहुत मुश्किल है।
ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए पूर्व में जिला प्रशासन ने गांव गांव विशेष तौर पर स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। सफाई कर्मियों के गैंग के गैंग गांवों में लगाए गए थे। वहीं हाल ही में एक बार फिर संचारी रोग के रोकथाम कार्यक्रम के तहत विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह गांव जिला प्रशासन के आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहा है? निस्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि गांव के विकास नाम पर आने वाली धनराशि का भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी है। नतीजे में गांव के विकास के लिए अपने प्रतिनिधि को चुनने वाली जनता स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही है।