संवाददाता आशुतोष मिश्रा

उन्नाव।सफीपुर एमएनबी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर पर मरीजों को बाहर से दवा लेने के लिए लिखा जाता है। इससे उन्हें स्वास्थ्य केंद्र पर सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए केंद्र प्रभारी की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
ब्रस्पतिवार को सीएचसी में एक जहर खाई युवती इलाज के दौरान सफीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आई। जहाँ एक ओर युवती इलाज के लिए तड़प रही थी। तो वहीं दूसरी ओर युवती के परिजन बिलख रहे थे। लेकिन हद तो उस वक्त हो गई। जब एक मोटी रकम पाने वाले डॉक्टर ही वहाँ मौजूद नहीं थे।
बताते चलें कि आशा पुत्री रामसेवक (22) महदीखेड़ा निवासी ने अज्ञात कारणों के चलते जहर खा लिया। लगभग शाम 5 बजे बेहोशी अवस्था में परिजन बड़ी उम्मीद के साथ उसे सीएचसी ले गए। लेकिन उन्हें स्वास्थ्य से मुहैया नहीं हो सकीं। युवती लगभग आधे घंटे अस्पताल परिसर में तड़पती रही। लेकिन उसका प्राथमिक उपचार करना, तो दूर किसी डॉक्टर व कर्मचारी ने देखना भी मुनासिब नहीं समझा। उस वक्त चिकित्सा प्रभारी ललित वर्मा उपस्थित नहीं थे। कौशलेन्द्र डॉक्टर के सीएचसी में मौजूद होने के बाद भी उसे इलाज नहीं मिल सका। युवती को गंभीर अवस्था में परिजन ठेलिया की मदद से अस्पताल ले गए। परिजन एम्बुलेंस को लगातार फोन लगते रहे, लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिल सकी। जबकि दो एम्बुलेंस पहले से सीएचसी में मौजूद थी। फिर युवती को परिजन प्राइवेट वाहन (बुलेरो) से जिला अस्पताल ले गए। एक ओर जहां यूपी के स्वास्थ्य मंत्री दुरुस्त स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का दम भरते नजर आते हैं। सफीपुर में स्वास्थ्य सुधिवाएँ बदहाल हैं