तबलीगी जमात के कार्यक्रम में कथित तौर पर शामिल होने वाले 35 देशों के 3,500 से अधिक विदेशी नागरिकों को कालीसूची में डाले जाने वाले केंद्र के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में विदेशी नागरिकों की ओर से कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जो फिलहाल भारत में ही हैं। सात माह की गर्भवती थाईलैंड की महिला द्वारा दायर याचिका समेत चार रिट याचिकाओं में केंद्र के दो अप्रैल को 960 विदेशी नागरिकों और चार जून को 2,500 से अधिक विदेशी नागरिकों को काली सूची में डालने के फैसले को चुनौती दी गई है। इस कारण वे 10 साल तक भारत की यात्रा नहीं कर सकते हैं। थाई महिला की याचिका में कहा गया, एकपक्षीय लिया गया फैसला नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, खासकर भारत में मौजूद इन विदेशी नागरिकों के मामले में, जिन्हें पहले अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और कोई नोटिस नहीं दिया गया। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित विदेशी नागरिकों को उनके आवाजाही और उनकी नागरिकता वाले देश वापस जाने के अधिकार से वंचित कर दिया गया।

वकील फुजैल अहमद अय्युबी की ओर से दायर याचिका में दलील दी गई कि भारत में मौजूद 35 देशों के 3,500 से अधिक विदेशी नागरिकों को पृथमदृष्टया अपना बचाव करने का मौका दिए बिना काली सूची में डालना संविधान के अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन है। थाई महिला ने कहा कि वह सात माह की गर्भवती है और अन्य याचिकाकर्ताओं की तरह ही उसे भी मार्च में पृथक-वास में भेजा गया था और उसे मई के अंत में पृथक-वास से रिहा किया गया। उन्होंने कहा कि अब भी वह प्रतिबंधित आवाजाही के तहत सुविधा केद्र मेंहै और अपने गृह राष्ट्र जाने का कोई रास्ता नहीं है, जहां वह अपने प्रियजनों के साथ सुरक्षा और सम्मान के साथ बच्चे को जन्म दे सके। याचिका में केंद्र के उपरोक्त फैसले को अमान्य एवं असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को इन विदेशी नागरिकों को कालीसूची से हटाने और वीजा बहाल करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है।