नई दिल्ली।।मुस्लिम जमीन पर अपना एकाधिकार साबित नहीं कर पाए। राम जन्मभूमि न्यास को यह जमीन दी जाती है। ट्रस्ट मंदिर बना सकेगा यह सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। अयोध्या मामले पर जमीन के मालिकाना हक पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आस्था के आधार पर नहीं बल्कि कानूनी पक्ष को देखते हुए ही फैसला लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अंग्रेजों के समय तक नमाज का कोई सबूत नहीं मिला है मस्जिद में इस्लामिक नियम के उल्लंघन का दावा भी खारिज हो गया है इस बात के भी सबूत मिले हैं कि भगवान राम का जन्म स्थान इसी ढांचे के अंदर था।मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह देने का आदेश दिया गया। राम जन्मभूमि राम लला की है। अयोध्या में ही 5 एकड़ की जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए जमीन मिलने के बाद सुन्नी उस जमीन का इस्तेमाल कर सकता है सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिंदू आस्था गलत होने का कोई प्रमाण नहीं है। मामले पर ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने asi में मन्दिर या ईदगाह का कोई सबूत नहीं है हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा है कि आस्था व विश्वास के आधार पर मालिकाना हक नही दिया जा सकता है।