सुनकर आप चौंक जाएंगे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के सबसे प्रदूषित 15 शहरों की सूची में 14 शहर भारत के हैं। कानपुर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में पहले नंबर पर पहुंच गया है। वहीं वाराणसी में भी एयर क्वालिटी में तेजी से गिरावट आई है।

पारा गिरने के साथ ही धुएं और फॉग के डरावने रूप ‘स्मॉग’ ने देश में दस्तक दे दी है। राजधानी दिल्ली और यूपी के कई शहरों में रविवार सुबह कई घंटे तक स्मॉग छाया रहा। पूरे देश में सबसे बुरा हाल कानपुर का रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक रविवार को यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 420 पहुंच गया। सिर्फ कानपुर ही नहीं, प्रदेश के सात और शहर वायु प्रदूषण के लिहाज से टॉप टेन में रहे। लखनऊ (323) की स्थिति भी अच्छी नहीं दिखी। हवा में कुछ सुधार होने के बावजूद यह देश में 12वें स्थान पर रहा।

मौसम विज्ञानियों ने चेताया है कि अभी तो शुरुआत है, प्रदूषण का सबसे खराब रूप दिखना बाकी है। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के एनवॉरन्मेंटल इफर्मेशन सिस्टम (एनविस) सेंटर की को-कोऑर्डिनेटर डॉ. बबिता कुमारी का कहना है कि वायु प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इंडस्ट्री से निकलने वाला धुआं है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के जियॉलजी डिपार्टमेंट के प्रफेसर और मौसम विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव सेन सिंह के मुताबिक जैसे-जैसे तापमान गिरेगा और हवा की गति में कमी आएगी, शहरों की एयर क्वॉलिटी में और गिरावट देखने को मिलेगी। हरियाली की जगह ले रहे कंक्रीट के जंगल तो अपना असर दिखाएंगे ही। पेड़ों की पत्तियां प्रदूषण के साथ-साथ धूल के कणों को भी सोख लेती हैं। लेकिन जब पेड़ ही नहीं होंगे तो यह काम कौन करेगा। इसके अलावा किसान अब भी पराली जला रहे हैं। उससे निकलने वाला धुंआ भी प्रदूषण और बढ़ाएगा।