स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में अद्भुत प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है. शनिवार को फाइनल मुकाबले में चोपड़ा ने दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर का बेस्ट थ्रो करके स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इसके साथ ही नीरज ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं. साथ ही, वह ओलंपिक के व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं.

टोक्यो खेलों में भारत का यह 7वां पदक है. इससे पहले कुश्ती में बजरंग पुनिया ने कांस्य दिलाया. पहलवान रवि दहिया और भारोत्तोलन में मीराबाई चनू ने रजत पदक पर कब्जा किया. भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता. बैडमिंटन में पीवी सिंधु और बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन के नाम भी कांस्य पदक हैं. बीजिंग ओलंपिक 2008 में पहली बार स्वर्ण पदक जीतने का कारनामा दिग्गज शूटर अभिनव बिंद्रा ने किया था.

नीरज चोपड़ा ने पहले प्रयास में 87.03 मीटर का थ्रो कर शानदार शुरुआत की. फिर नीरज ने दूसरे थ्रो में 87.58 मीटर दूर जैवलिन फेंका. नीरज का तीसरा थ्रो बढ़िया नहीं रहा और वह 76.79 मीटर जैवलिन थ्रो कर पाए. चेक गणराज्य के जैकब वाडलेजचो ने 86.67 मीटर का थ्रो करके रजत पदक अपने नाम किया. वहीं, चेक रिपब्लिक के ही विटदेस्लाव वेसेली 85.44 मीटर का बेस्ट थ्रो करके कांस्य पदक जीतने में सफल रहे.

फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह का सपना पूरा किया

नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक जीतकर ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह के सपने को साकार किया है. मिल्खा सिंह का यह था कि कोई भारतीय ट्रैक और फील्ड में ओलंपिक पदक जीते. इस दौरान मिल्खा महज सेकेंड के दसवें हिस्से से भारत के लिए पदक जीतने से चूक गए थे. 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में पीटी उषा महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल मुकाबले में पहुंचीं. मिल्खा सिंह की तरह वो भी ओलंपिक पदक जीतने से सेकेंड के सौवें हिस्से से चूक गई थीं. चोपड़ा ने बुधवार को क्वालिफाइंग दौर में अपने पहले ही प्रयास में भाले को 86.65 मीटर की दूरी तक फेंककर फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था

 

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